नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। 5 मई 2026 को कार्यवाहक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee Press Conference) ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए स्पष्ट कर दिया कि वे इस्तीफा नहीं देंगी। ममता ने कड़े शब्दों में कहा, "मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। हम चुनाव हारे नहीं हैं, हमें साजिश के तहत हराया गया है। मैं लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं दूंगी, क्योंकि नैतिक तौर पर जीत हमारी हुई है।"
'100 सीटें लूटी गईं और 90 लाख नाम काटे गए'
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर चुनाव परिणामों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने चुनाव आयोग का औजार के रूप में इस्तेमाल किया है। सीएम ममता के अनुसार, "हमारी 100 सीटें लूट ली गईं और 90 लाख मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतदाता सूची (SIR) से हटा दिए गए। भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर एक गंदा और घटिया खेल खेला है, जिसे मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी नहीं देखा।"
EVM और चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को 'खलनायक' करार दिया। उन्होंने EVM की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए कहा, "वोटिंग के बाद EVM मशीन 80-90% चार्ज कैसे रह सकती है? आमतौर पर यह 40% से नीचे होती है। चुनाव से दो दिन पहले हमारे लोगों को गिरफ्तार किया गया, IPS और IAS अधिकारियों को बदल दिया गया और भाजपा की पसंद के अधिकारियों को तैनात किया गया।" उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना केंद्रों पर उन्हें धक्का देकर बाहर निकाला गया और उनके एजेंटों के साथ मारपीट की गई।
'इंडी' गठबंधन के साथ की मजबूती और भविष्य की रणनीति
हार के बावजूद ममता बनर्जी ने विपक्षी एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव समेत 'इंडी' गठबंधन के तमाम नेताओं ने उन्हें फोन कर अपना समर्थन दिया है। ममता ने कहा, "अखिलेश यादव कल कोलकाता आ रहे हैं। आने वाले दिनों में हमारी एकजुटता और मजबूत होगी। मेरा लक्ष्य साफ है – मैं अब एक 'आजाद पंछी' की तरह पूरे देश में इंडी गठबंधन को मजबूत करने का काम करूँगी।"
'कुर्सी की मोहताज नहीं, मैं एक आजाद पंछी हूं'
ममता ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने पिछले 15 वर्षों में न तो पेंशन ली और न ही तनख्वाह का एक पैसा निकाला। उन्होंने कहा, "अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, इसलिए मैं एक आम आदमी हूं। अब कोई यह नहीं कह सकता कि मैं सत्ता का इस्तेमाल कर रही हूँ। मैंने अपनी पूरी जिंदगी लोगों की सेवा में लगा दी है और अब मैं जनता के बीच जाकर इस अन्याय के खिलाफ लड़ूंगी।"

